
दशलक्षण महापर्व का समापन, क्षमावाणी के साथ जैन समाज में भक्ति और आत्म-साधना का संदेश,,
नीलकमल सिंह ठाकुर
मुंगेली- दिगम्बर जैन समाज का पवित्र दस दिवसीय दशलक्षण महापर्व भक्ति, संयम, तप और आत्म-साधना के वातावरण के बीच संपन्न हुआ। भाद्रपद शुक्ल पंचमी से अनंत चतुर्दशी तक चले इस महापर्व के दौरान समाज के श्रद्धालुओं ने आत्म-निरीक्षण, उपवास, एकासन और विभिन्न धार्मिक नियमों का पालन करते हुए आत्मशुद्धि की साधना की।
दिगम्बर जैन समाज के सचिव विकास जैन ने बताया कि दशलक्षण महापर्व के दौरान धर्म के दस स्वरूपों की आराधना की गई। इनमें उत्तम क्षमा, उत्तम मार्दव, उत्तम आर्जव, उत्तम शौच, उत्तम सत्य, उत्तम संयम, उत्तम तप, उत्तम त्याग, उत्तम आकिंचन्य और उत्तम ब्रह्मचर्य शामिल हैं।

मंदिर में हुए विशेष धार्मिक आयोजन
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर मुंगेली को दशलक्षण महापर्व के अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया। प्रतिदिन सुबह भगवान जिनेंद्र का अभिषेक, शांतिधारा और विशेष पूजन किया गया। भोपाल गुरुकुल से आए विद्वान श्री शुभ जी जैन शास्त्री ने प्रतिदिन धार्मिक प्रवचन और दोपहर में धार्मिक कक्षाओं के माध्यम से जैन धर्म के सिद्धांतों एवं ग्रंथों का अध्ययन कराया। वहीं श्री शुभ जी जैन एवं अखिल जी जैन द्वारा प्रतिदिन अभिषेक और विशेष संगीतमय पूजन कराया गया।

शाम के समय आरती के साथ धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजित किए गए। इन आयोजनों में समाज के श्रावक-श्राविकाओं के साथ बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने किया तप
दशलक्षण महापर्व के दौरान समाज के श्रद्धालुओं ने अपनी-अपनी सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न प्रकार के व्रत और उपवास किए। कुछ श्रद्धालुओं ने निर्जला उपवास रखा, तो कुछ ने एक समय जल ग्रहण कर अथवा एक ही प्रकार का अन्न लेकर उपवास किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने एकासन व्रत में भाग लिया।
कुछ श्रद्धालुओं ने रसयुक्त एकासन का भी पालन किया, जिसमें निर्धारित दिनों में नमक, तेल, घी या शक्कर जैसी वस्तुओं का त्याग करते हुए साधना की गई।

अनंत चतुर्दशी पर निकली घट यात्रा
महापर्व के अंतिम दिन अनंत चतुर्दशी पर सुबह से ही मंदिर में अभिषेक और पूजन का आयोजन हुआ। दोपहर करीब 2 बजे समाज की महिलाओं द्वारा मंगल कलश के साथ घट यात्रा निकाली गई। इसके बाद 1008 श्री शांतिनाथ भगवान की प्रतिमा की महाशांतिधारा की गई।
इसके पश्चात पूरे समाज द्वारा क्षमावाणी पर्व मनाया गया। समाज के धर्मावलंबियों ने उत्तम क्षमा का भाव रखते हुए जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगी। इस दौरान “खामेमि सव्व जीवे” की भावना के साथ श्रद्धालु एक-दूसरे के घर पहुंचे और परिवार सहित क्षमा याचना की।
समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों का रहा सहयोग
पूरे महापर्व के दौरान समाज के अध्यक्ष शरद जैन के नेतृत्व में धार्मिक आयोजन संपन्न हुए। कार्यक्रमों को सफल बनाने में कार्यकारी अध्यक्ष पवन जैन, वरिष्ठ सदस्य ज्ञानचंद जैन, सुधीर जैन, मंत्री अनूप जैन, सह सचिव संजीव जैन, उपाध्यक्ष आनंद जैन, डॉ. सौरभ जैन, कोषाध्यक्ष आशीष जैन सहित समाज के कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही।
जैन समाज के अनुसार, दशलक्षण महापर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, संयम और आत्मशुद्धि के माध्यम से आत्मा को परमात्मा की दिशा में ले जाने का पावन अवसर है।

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