
सिटी कोतवाली थाना में आर्म्स एक्ट के आरोपियों को थाने लाकर छोड़ने का आरोप, अब फरार बताए जा रहे चार आरोपी,,
CM हेल्पलाइन पोर्टल और गृह मंत्री के संज्ञान में मामला पहुंचने के बाद कार्रवाई, फिर थाने से छोड़े जाने की चर्चा; सिटी कोतवाली की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,,
नीलकमल सिंह ठाकुर
मुंगेली- गंभीर अपराधों के आरोपियों पर त्वरित कार्रवाई को लेकर पुलिस प्रशासन लगातार सख्ती के निर्देश देता रहा है, लेकिन मुंगेली सिटी कोतवाली से जुड़ा एक मामला अब पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि आर्म्स एक्ट सहित गंभीर धाराओं में नामजद चार आरोपियों को पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़कर थाने लाया और करीब चार घंटे तक थाने में बैठाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। अब यही आरोपी पुलिस की नजर में फरार बताए जा रहे हैं।

शिकायत कर्ता
मामला मुंगेली जिले के ग्राम पंचायत निरजाम से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां सरपंच के साथ कथित विवाद और मारपीट के बाद पुलिस ने अपराध दर्ज किया था। प्रकरण में आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 सहित अन्य धाराएं लगाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि एफआईआर में दर्ज धाराओं, गिरफ्तारी की स्थिति और पुलिस द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया की आधिकारिक पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड से होना बाकी है।


गृह मंत्री के संज्ञान में पहुंचा था मामला
सूत्रों के अनुसार, आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर मामला प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा के संज्ञान में पहुंचा था। इसके बाद पुलिस को आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की चर्चा है। आरोप है कि इसके बाद पुलिस ने जितेंद्र साहू सहित चार आरोपियों को घेराबंदी कर पकड़ा और सिटी कोतवाली थाने लेकर पहुंची।
बताया जा रहा है कि आरोपियों को कई घंटे थाने में रखने के बाद उन्हें वहां से जाने दिया गया। इसके बाद अब संबंधित आरोपी पुलिस रिकॉर्ड में फरार बताए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस की गिरफ्तारी प्रक्रिया और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
थाना प्रभारी के कथित बयान से भी उठे सवाल
मामले में सिटी कोतवाली थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े के कथित बयान की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी की ओर से कहा गया कि मामले को उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाने के बाद आरोपियों को थाने से जाने दिया गया और अगले दिन उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
यदि ऐसा बयान दिया गया है, तो सवाल उठता है कि गंभीर धाराओं में दर्ज मामले में आरोपियों को थाने से जाने देने का आधार क्या था? क्या इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों से कोई स्पष्ट निर्देश प्राप्त हुए थे? यदि निर्देश मिले थे तो क्या उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड है?


आर्म्स एक्ट की धाराएं,
फिर गिरफ्तारी के बजाय छोड़े जाने पर सवाल
मामले में आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 लगाए जाने की बात सामने आने के बाद पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं। यदि जांच के दौरान आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी योग्य आधार मौजूद था, तो उन्हें थाने लाने के बाद छोड़े जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या उन्हें छोड़ने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया? क्या इस संबंध में केस डायरी या अन्य पुलिस रिकॉर्ड में कोई उल्लेख किया गया है?
इन सवालों का वास्तविक जवाब पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
धारा 354 की शिकायत का भी जिक्र
मामले में संबंधित पक्ष की ओर से भारतीय दंड कानून की धारा 354 से संबंधित शिकायत किए जाने की भी जानकारी सामने आ रही है। हालांकि शिकायत की वर्तमान स्थिति, एफआईआर में शामिल धाराओं और उस पर पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

वरिष्ठ अधिकारियों की जांच से साफ होगी स्थिति
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुलिस द्वारा थाने लाए गए आरोपियों को किन परिस्थितियों में छोड़ा गया और क्या इसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को थी। यदि आरोपियों को छोड़ने के संबंध में वरिष्ठ स्तर से निर्देश दिए गए थे, तो उसका स्पष्ट आधार सामने आना चाहिए। वहीं यदि पुलिस स्तर पर प्रक्रिया में कोई चूक हुई है तो इसकी जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
मामले में मुंगेली पुलिस अधीक्षक और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपियों को थाने लाने के बाद उन्हें क्यों छोड़ा गया, उस समय कौन-सी कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई और वर्तमान में उन्हें फरार क्यों बताया जा रहा है।
फिलहाल आर्म्स एक्ट सहित गंभीर धाराओं के मामले में चार आरोपियों को पकड़कर थाने लाने, कई घंटे रखने और फिर छोड़ दिए जाने के आरोप ने मुंगेली सिटी कोतवाली की कार्रवाई और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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