
भीमराव अम्बेडकर शिक्षण संस्थान द्वारा सावित्रीबाई फुले की मनाई जयंती,,,
नीलकमल सिंह ठाकुर
मुंगेली- डॉ. भीमराव अम्बेडकर शिक्षण संस्थान द्वारा सावित्रीबाई फुले जयंती के अवसर पर मातृ सम्मेलन एवं समाज कल्याण तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय योगदान के लिए अशासकीय विद्यालय के महिला संचालकों एवं प्राचार्यों का सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। संस्थाध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर, व्यवस्थापक एच.आर. भास्कर, उपाध्यक्ष एस.पी.कौशिक, अति विशिष्ट अतिथि सुश्री कृष्णा काले, अध्यक्षता जिला शिक्षा अधिकारी के विशेष प्रतिनिधि विमित्रा घृतलहरे तथा विशिष्ट अतिथि लक्ष्मी सोनी एवं शांति भास्कर की उपस्थिति में मनाया गया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों द्वारा सावित्रीबाई फुले, मिनीमाता, डॉ. भीमराव अम्बेडकर एवं संस्थाध्यक्ष की दिवंगत माता स्व.नीरादेवी के छायाचित्र के समक्ष द्वीप प्रज्जवलन कर प्रार्थना की गई। शिक्षिका सुश्री नीलू जांगड़े एवं छात्रा स्नेहा घृतलहरे द्वारा संविधान के प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया गया। छात्राओं द्वारा स्वागत गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया गया। तत्पश्चात सावित्री बाई फुले के कृतित्व को प्रहसन के रूप में विद्यालय के छात्रों एवं शिक्षकों द्वारा प्रदर्शन कर बताया गया। इस अवसर पर विद्यालय के विभिन्न कक्षाओं के 100 से भी अधिक छात्र-छात्राएं व शिक्षिकाएं सावित्री बाई फुले के आकर्षक वेशभूषा में उपस्थित रहे।

सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा उनके जीवनगाथा को संक्षिप्त रूप में अपने-अपने कक्षा के छात्रों को बताया गया। प्रोजेक्टर के माध्यम से उनके जीवनगाथा पर आधारित टेलीफिल्म दिखाई गई। विशिष्ट अतिथि श्रीमती लक्ष्मी सोनी बच्चे के सुंदर वेशभूषा की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुराने समय में महिलाओं के लिए कोई गुरू व विद्यालय का कोई उल्लेख नहीं है इतने वर्षों बाद स्वयं संघर्ष कर पढ़ी और प्रथम महिला शिक्षिका बनी अंत में विद्यालय की उज्जवल भविष्य की कामना की। श्रीमती शांति भास्कर ने कहा कि मैं उनके साहित्यों को पढ़कर समझी हूं कि उस समय के महिलाओं की जो दैनीय स्थिति थी ऐसी परिस्थिति में पढ़ना और पढ़ाना शुद्रों की वश में नहीं थी। शिक्षा का अधिकार केवल उच्च वर्ग के लोगों के लिए था। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं जिला शिक्षा अधिकारी मुंगेली के प्रतिनिधि विमित्रा घृतलहरे ने कहा कि ऐसा कार्यक्रम मुंगेली में और कहीं देखने को नहीं मिला केवल अम्बेडकर संस्थान नेे सावित्री बाई फुले जयंती पर सम्मान एवं विविध कार्यक्रम कर नारियों को सावित्रीबाई फुले नारीरत्न सम्मान देने का कार्य बिल्कुल अतुलनीय है उन्होंने बच्चों से कुछ प्रश्न पूछी तथा उत्तर भी दिये हम तो एक सावित्री बाई फुले को जानते हैं पर यहां तो अनेक सावित्रीबाई फुले दिखाई दे रहीं है उनके वेशभूषा पहन लेने मात्रा से सावित्री बाई फुले नहीं बन पायेंगे बल्कि उनके कृतित्व को आत्मसात करें। संस्थान के इस कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की आज मुझे मेरे माता-पिता एवं गुरू के साथ नारीरत्न सम्मान मिलना गौरव की बात है। कार्यक्रम की अति विशिष्ट अतिथि सुश्री कृष्णा काले ने बताया कि भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में हुआ पिता खंदोजी तथा माता का नाम लक्ष्मी था। 10 वर्ष की आयु में ही उनका बाल विवाह 1841 में ज्योतिबाराव फुले से हुआ था। भारत में पहले बालिका विद्यालय सन 1848 में खोली गई जिसकी सावित्रीबाई फुले पहले संस्थापक और प्राचार्य थी। सावित्री बाई फुले के संरक्षक, गुरू और समर्थक उसके पति ज्योतिबाराव फुले ही थे। प्रथम शिक्षक होने के साथ भारत के नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता, समाज सुधारक और मराठी कवीयित्री थी। उन्हें बालिकाओं को शिक्षित करने के लिए समाज का कड़ा विरोध झेलना पड़ा था। कई बार तो ऐसा भी हुआ जब इन्हें गोबर, कीचड़ तथा पत्थर की मार भी सहने पड़े। सावित्री बाई के कारण ही आज हम महिलायें इस सम्मानजनक स्थिति में हैं। उपाध्यक्ष कौशिक जी ने कार्यक्रम को संबोधित कर कार्यक्रम आयोजन के लिए पाँच हजार राशि सहयोग प्रदान किया। संस्थाध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर ने कहा कि आजादी के पहले तक भारत में महिलाओं की गिनती दोयम दर्जे में होती थी। उन्हें शिक्षा का अधिकार तक भी नहीं था। ऐसे समय में सावित्री बाई फुले ने जो कर दिखाया वह कोई साधारण उपलब्धि नहीं थी। उन्होंने सभी सामाजिक रीति-नीतियों को छोड़कर अपने पति का अंतिम संस्कार किया और मुखाग्नि दी। जीवनभर संघर्ष कर अनेक कठिनाईयों को सहते हुए 10 मार्च 1897 को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी प्रेरणा से आज भारत में महिलाएं पढ़-लिखकर देश के विकास में बराबरी का भागीदार बन रहीं हैं। नारी शिक्षा के उदाहरण के रूप में देश के प्रथम नागरिक व राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद पर वर्तमान में द्रोपती मुर्मु सुशोभित हो रही हैं। इस तरह आज देश के नारी शिक्षा की जननी एवं क्रांति ज्योति के रूप में सावित्री बाई फुले को जाना जाता है। अंत में समाज कल्याण तथा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय योगदान के लिए महिला संचालकों एवं प्राचार्यो सुश्री गीताराय(मरणोपरांत) कस्तुरबा स्कूल मुंगेली के प्रतिनिधि गीता देवांगन, शांति भास्कर, लक्ष्मी सोनी सेनि.सशिमं मुंगेली, कृष्णा काले सेनि.जेसीज पब्लिक स्कूल मुंगेली, सुचित्रा श्रीवास्तव प्रथम प्रधानपाठिका अम्बेडकर स्कूल मुंगेली के प्रतिनिधि, विमित्रा घृतलहरे एबीईओ मुंगेली, आशा दिवाकर प्राचार्य एवं अनिता साहू प्रधानपाठक अम्बेडकर स्कूल मुंगेली, खेमलता रात्रे प्रधानपाठक अम्बेडकर स्कूल संजारी-नवागांव बलौदाबाजार, अलीमून निशा प्रधानपाठक राजीवगांधी आदर्श स्कूल मुंगेली, रश्मि तंबोली प्राचार्य एन.के. एजूकेशनल एकेडमी पथरिया, सुश्री रोशनी गोस्वामी प्राचार्य तिरूपति बालाजी पब्लिक स्कूल जरहागांव, शैल सोनले विद्वान पब्लिक स्कूल बरदूली, रीना अनंत प्राचार्य नेहा पब्लिक स्कूल छीतापार को संस्थान द्वारा ‘‘क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले नारीरत्न सम्मान 2026’’ से शाल, श्रीफल, मोमेंटो, प्रशस्ति पत्र तथा पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। अंत में संस्थाध्यक्ष की दिवंगत माता नीरादेवी के निधन पर दो मिनट मौन रखकर श्रद्धांजली दी गई आभार प्रदर्शन उपप्राचार्य छत्रपाल डाहिरे ने किया। इस अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्रा, शिक्षक-शिक्षिकाएं, महिला अभिभावक एवं संस्था परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

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