

मुंगेली में 4 अप्रैल को इतिहास रचेगा महाराणा प्रताप की प्रतिमा का भव्य आगमन,,
नीलकमल सिंह ठाकुर
मुंगेली – नगर के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास में 4 अप्रैल का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है। इस दिन नगर के प्रमुख स्थल पड़ाव चौक में शौर्य, वीरता और स्वाभिमान के प्रतीक महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिमा का भव्य आगमन होगा महाराणा प्रताप की विशाल मूर्ति की स्वागत बेमेतरा से होते हुए नवागढ़ फिर मुंगेली जिले के टेमरी में और फिर लाइफ लाइन हॉस्पिटल के पास मुंगेली में भव्य स्वागत की तैयारी की जा रही है ।

यह आयोजन क्षत्रिय समाज के लगभग तीन दशकों के लंबे इंतजार, संघर्ष और संकल्प का परिणाम है।इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत वर्ष 1995 में हुई थी, जब तत्कालीन क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष स्वर्गीय विपनेश सिंह परिहार ने समाज के गौरव को पुनर्स्थापित करने का संकल्प लिया।

उन्होंने तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष अनिल सोनी के समक्ष पड़ाव चौक का नाम “महाराणा प्रताप चौक” रखने और वहां उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था।
वर्षों पहले बोया गया यह संकल्प आज साकार रूप ले रहा है। वर्तमान अध्यक्ष आनंद वल्लभ सिंह के नेतृत्व में इस मांग को नई गति मिली और प्रशासनिक समन्वय के माध्यम से इसे मूर्त रूप दिया गया। उनके सतत प्रयासों के कारण अब प्रतिमा स्थापना का सपना हकीकत बनने जा रहा है।

यह यात्रा केवल एक प्रतिमा स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि 1995 से 2026 तक समाज की वैचारिक एकता और निरंतरता का प्रतीक है। स्वर्गीय विपनेश सिंह परिहार ने जहां इस आंदोलन की नींव रखी और सामाजिक मंगल भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थापना में योगदान दिया, वहीं आनंद वल्लभ सिंह ने उस विरासत को आगे बढ़ाते हुए उसे पूर्णता तक पहुंचाया।
आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता—शिवप्रताप सिंह, उमाकांत सिंह, गजानंद सिंह, हरिकपुर सिंह, नागेश्वर सिंह, गोकुलेश सिंह, संतोष सिंह, राजू सिंह एवं वंशराज सिंह—इस भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे हैं। साथ ही वे स्व. विपनेश सिंह परिहार के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।
प्रतिमा स्थापना के बाद पड़ाव चौक केवल एक व्यावसायिक केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि यह स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा। यह आयोजन समाज की एकता, नेतृत्व की प्रतिबद्धता और पूर्वजों के सपनों को साकार करने की प्रेरणादायक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
पूरा मुंगेली इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने को उत्साहित है।

