मुंगेली में 26.87 लाख की सरकारी राशि निकासी मामला: 10 महीने बाद भी FIR नहीं, जिला प्रशासन – पुलिस प्रशासन आमने-सामने,,
बैंक ने कर्मचारी को निलंबित कर राशि लौटाई, लेकिन FIR को लेकर प्रशासन और पुलिस के अलग-अलग दावे; मामले की निष्पक्ष जांच की उठी मांग,,
नीलकमल सिंह ठाकुर
मुंगेली- मुंगेली में सरकारी खाते से 26 लाख 87 हजार रुपये की अनधिकृत निकासी का मामला 10 महीने बाद भी कानूनी कार्रवाई के अभाव में सवालों के घेरे में है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा में कथित रूप से बैंक कर्मचारी द्वारा अधिकारियों की आईडी का दुरुपयोग कर सरकारी खाते से राशि निकाले जाने का आरोप है। बैंक ने अपनी आंतरिक जांच के बाद संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर राशि सरकारी खाते में वापस जमा करा दी, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं होने से मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

मामले में अपर कलेक्टर जी.एल. यादव का कहना है कि 13 मार्च को ही थाना सिटी कोतवाली में आवेदन देकर एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। उनके अनुसार अब पुलिस का दायित्व है कि आवश्यक जांच कर बैंक से जानकारी प्राप्त करे और नियमानुसार अपराध दर्ज करे।



वहीं, थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े का कहना है कि प्रारंभिक आवेदन में तथ्य और आंकड़े स्पष्ट नहीं थे। पुलिस द्वारा बार-बार सही दस्तावेज और बैंकिंग प्रक्रिया से संबंधित जानकारी मांगे जाने के बाद संशोधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। उनका कहना है कि बैंक के खातेदार जिला प्रशासन है उनके और बैंक प्रबंधन कमेटी द्वारा जांच में एक बैंक कर्मचारी का नाम बैंक प्रबंधन द्वारा जांच में सामने लाया गया है, उसके बावजूद शिकायत अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध दी गई है। ऐसे में नामित आरोपी होने के बावजूद अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करना प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

जानकारी के अनुसार बैंक ने अपनी जांच समिति की रिपोर्ट में अपने ही बैंक के एक कर्मचारी को जिम्मेदार मानते हुए निलंबित किया है और इसकी जानकारी प्रशासन को भी दी गई है। इसके बावजूद शिकायत में आरोपी का नाम शामिल नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
इस बीच जिला कलेक्टर कुंदन कुमार ने कुछ समय पहले मीडिया से चर्चा में कहा था कि मामले का परीक्षण कर शीघ्र एफआईआर दर्ज कराई जाएगी तथा दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हालांकि अब तक अपराध दर्ज नहीं होने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

यह मामला केवल 26.87 लाख रुपये की अनधिकृत निकासी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी धन की सुरक्षा और जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। बैंक द्वारा राशि वापस कर दिए जाने के बावजूद कानूनी कार्रवाई लंबित रहने पर विभिन्न स्तरों पर चर्चा हो रही है। कई लोगों का मानना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, जैसे सी आई डी ,एसीबी, से कराई जानी चाहिए ताकि सभी तथ्यों की पारदर्शी जांच हो सके। बुद्धिजीवियों के अनुसार ये सिर्फ मुंगेली जिले के एक बैंक के प्रशासनिक एकाउंट का मामला ही नहीं अंदेशा ये लगाया जा रहा है कि इसके तार पूरे प्रदेश में प्रशासनिक बैंक खातों से भी जुड़ा हो सकता है।
फिलहाल, बैंक, प्रशासन और पुलिस के अलग-अलग दावों के बीच यह मामला अब भी अधर में लटका हुआ है और 10 महीने बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने से कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं।


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