16 साल बाद फूटा कॉलोनीवासियों का गुस्सा, अवैध प्लाटिंग करने वालों पर FIR दर्ज करा कर कार्रवाई और मूलभूत सुविधाओं की रखी मांग,,
नीलकमल सिंह ठाकुर
मुगेली- नगर पालिका क्षेत्र के शिवाजी वार्ड स्थित सचिपुरम कॉलोनी और पंडित दीनदयाल वार्ड की सोनकर कॉलोनी के रहवासियों का वर्षों से दबा आक्रोश एक बार फिर सामने आ गया है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव से परेशान कॉलोनीवासियों ने कलेक्टर और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अवैध प्लाटिंग करने वाले कॉलोनाइजरों एवं भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और कॉलोनियों में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली सहित सभी आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।

16 वर्षों से सुविधाओं का इंतजार
रहवासियों का कहना है कि करीब 16 वर्ष पहले कॉलोनाइजरों ने आकर्षक वादों के साथ लोगों को प्लॉट बेचे थे। उस समय कॉलोनी में पक्की सड़क, नाली, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित करने का भरोसा दिलाया गया था। हालांकि प्लॉट बिक्री के बाद कॉलोनाइजर अपने वादों से मुकर गए और आज तक विकास कार्यों की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसके कारण सैकड़ों परिवार नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

300 से अधिक परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित
ज्ञापन के अनुसार, सचिपुरम कॉलोनी में वर्तमान में 300 से अधिक मकान बन चुके हैं और बड़ी संख्या में परिवार वर्षों से यहां निवास कर रहे हैं। इसके बावजूद आज भी सड़क, नाली, पेयजल और जल निकासी जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। बरसात के दिनों में कीचड़ और जलभराव के कारण आवागमन प्रभावित हो जाता है, जबकि पेयजल और सफाई व्यवस्था भी बड़ी समस्या बनी हुई है।

कॉलोनाइजरों पर वादाखिलाफी का आरोप
कॉलोनीवासियों ने आरोप लगाया है कि कॉलोनाइजरों ने विकास कार्यों का सपना दिखाकर लोगों से लाखों रुपये लेकर प्लॉट बेच दिए, लेकिन बाद में अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हट गए। वहीं, नगर पालिका ने कॉलोनी को अवैध घोषित कर दिया, लेकिन इतने वर्षों में न तो कॉलोनाइजरों पर प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही रहवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

अवैध प्लाटिंग की निष्पक्ष जांच की मांग
रहवासियों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध प्लाटिंग करने वाले कॉलोनाइजरों और भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही दोषियों से विकास शुल्क और अन्य आवश्यक राशि की वसूली कर कॉलोनियों में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली एवं अन्य सुविधाएं विकसित करने की मांग भी की गई है।

कॉलोनी अवैध तो फिर टैक्स वसूली कैसे?
कॉलोनीवासियों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अधिकांश लोगों ने बैंक ऋण लेकर मकान बनाए हैं और भवन कर जमा करने तथा भवन अनुज्ञा मिलने के बाद ही उन्हें ऋण स्वीकृत हुआ है। यदि कॉलोनी अवैध है तो फिर संपत्ति कर (हाउस टैक्स) क्यों वसूला जा रहा है?
रहवासियों ने बताया कि नगर पालिका द्वारा हाल ही में भवन कर वसूली के लिए घरों में बारकोड भी लगाए गए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब कॉलोनी को अवैध बताकर मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं, तो कर वसूली किस आधार पर की जा रही है।

चुनाव के समय वादे, बाद में उपेक्षा
रहवासियों ने जनप्रतिनिधियों पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि चुनाव के दौरान कॉलोनी में विकास और सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। वर्षों से लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी केवल आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से बचते रहे हैं।

आंदोलन की चेतावनी
कॉलोनीवासियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध प्लाटिंग करने वालों पर कार्रवाई नहीं की गई और कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कॉलोनियां अवैध थीं तो 16 वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और यदि नगर पालिका नियमित रूप से कर वसूल रही है तो नागरिकों को उनके अधिकार की बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी? यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस बार केवल आश्वासन देता है या वास्तव में वर्षों से परेशान सैकड़ों परिवारों को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाता है।

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